मेरो कलम
लक्ष्मण ढकालका लेख तथा रचानाहरुको सँग्रह
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Wednesday, July 13, 2016
मुक्तक
सम्झना मात्रै पलपल, रहर अधुरो
छैनौ तिमी मेरो साथ, सहर अधुरो
सजायका सपना दुई-किनारा बन्दा
न मार्छ न बचाउछ, जहर अधुरो ।।
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